सरूर लखनवी की पुस्तक का संपादन, जो बहुत अच्छे शायर थे और जो अतीत के गर्भ में समा गये थे, उनकी उर्दू की पुस्तक है, जिसका लिप्यान्तरण लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रो0 डॉ0 फ़ाज़िल अहसन हाशमी ने किया है।
17 कहानियों का संग्रह जो समय-समय पर सरिता, मनोरमा जैसी पत्रिकाओं में और दैनिक जागरण, प्रयागराज टाइम्स जैसे समाचार-पत्र में प्रकाशित हुई, जिनमें कुछ कहानियाँ 26 साल बाद सरिता ने अपने वेबसाइट पर डाली, जिस पर पाठकों की अच्छी प्रतिक्रिया आई।